“आगे की तैयारी: Unique Identification Authority of India (UIDAI) ने ‘Aadhaar विजन 2032’ के लिए हाई-लेवल एक्सपर्ट पैनल गठित किया”
नई दिल्ली, 1 नवंबर 2025: भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली को अगली पीढ़ी में ले जाने के इरादे से UIDAI ने एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस पैनल का लक्ष्य है आने वाले दशक में Aadhaar को तकनीकी और साइबर सुरक्षा के लिहाज़ से ‘फ्यूचर-रेडी’ बनाना।
(UIDAI ने यह कदम ‘Aadhaar विजन 2032’ नामक रूपरेखा के तहत उठाया है।)
मुख्य बातें
- UIDAI ने ‘Aadhaar विजन 2032’ तैयार करने के लिए हाई-लेवल एक्सपर्ट पैनल बनाया है।
- पैनल की चेयरपर्सनशिप UIDAI के अध्यक्ष Neelkanth Mishra कर रहे हैं।
- इसमें तकनीक, कानून, अकादमी और उद्योग के विशेषज्ञ शामिल हैं-जैसे Dheeraj Pandey, Mayank Vatsa, Anil Jain आदि।
- नए रूपरेखा में Aadhaar को एआई, ब्लॉकचेन, क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड एनक्रिप्शन जैसे आधुनिक तकनीकों से लैस करने का प्रस्ताव है।
- यह पहल उस समय आई है जब डिजिटल पहचान-सेवा, साइबर खतरों व डेटा-सुरक्षा की चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
क्या हुआ?
नई दिल्ली में 31 अक्टूबर 2025 को जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, UIDAI ने ‘Aadhaar विजन 2032’ नामक रणनीति तैयार करने एवं उसे लागू करने के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) गठित की है।
समिति की अध्यक्षता UIDAI के चेयरपर्सन Neelkanth Mishra कर रहे हैं। समिति में शामिल अन्य सदस्य हैं UIDAI सीईओ Bhuvnesh Kumar, Nutanix के संस्थापक Dheeraj Pandey, MOSIP इंजीनियरिंग-हेड Sasikumar Ganesan, कानूनी विशेषज्ञ Rahul Matthan, IIT-Jodhpur के प्रोफेसर Mayank Vatsa, Michigan State University के प्रोफेसर Anil Jain और अन्य।
बयान में कहा गया है कि यह समीक्षा–रणनीति आगामी दस वर्षों में Aadhaar को तकनीकी रूप से सक्षम, सुरक्षित और लोगों-के-केन्द्रित पहचान प्रणाली बनाने पर केंद्रित होगी।
प्रमुख तथ्य/डाटा
- ‘Aadhaar विजन 2032’ के माध्यम से UIDAI अपनी तकनीकी आधार (technology stack) को उन्नत करने का इरादा रखता है – इसमें स्केलेबिलिटी (विस्तार-योग्यता), साइबर सुरक्षा, डेटा-प्रोटेक्शन और वैश्विक मानदंड-अनुरूपता शामिल है।
- समिति के गठन के पीछे एक प्रमुख कारण है कि डिजिटल-परिस्थितियाँ और पहचान-उपकरण तेजी से बदल रहे हैं – इसलिए Aadhaar को भविष्य-उन्मुख बनाना आवश्यक हो गया है।
- सदस्य-संख्या में तकनीक, कानून, अकादमी और उद्योग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं – यह दिखाता है कि UIDAI न सिर्फ तकनीकी अपग्रेड बल्कि नीति-विधि-सहयोग और नवाचार पर भी ध्यान दे रहा है।
प्रतिक्रियाएँ
समिति गठन की घोषणा के बाद, डिजिटल-पहचान-विश्लेषकों एवं नीति-नियन्त्रकों ने इसे सकारात्मक संकेत माना है कि Aadhaar प्रणाली सिर्फ वर्तमान पर ही नहीं, अगले दशक की चुनौतियों व अवसरों के लिए तैयार की जा रही है।
एक तकनीकी रिसर्च विश्लेषक का कहना है कि “अगर Aadhaar अगले चरण में AI-आधारित पहचान, ब्लॉकचेन-संचालित सत्यापन और क्वांटम-सुरक्षा को अपनाती है तो यह वैश्विक लेवल पर भारत की डिजिटल पहचान को मजबूत कर सकती है।”
हालाँकि, कुछ गोपनीयता-वाले पर्यवेक्षकों ने आगाह किया है कि “नवीन तकनीकों के साथ डेटा-सुरक्षा व नागरिक-गोपनीयता सुनिश्चित करना भी उतना ही चुनौतीपूर्ण है जितना तकनीकी अपग्रेड।”
वर्तमान स्थिति / आगे क्या होगा
प्रारंभिक तौर पर समिति को कहा गया है कि वह आगामी 6-12 महीनों में ‘Aadhaar विजन 2032’ नामक रूपरेखा पेश करे जिसमें तकनीकी रोडमैप, साइबर खतरे-मिटिगेशन रणनीति, डेटा-प्रोटेक्शन मानक और नवाचार-गतिविधियों को शामिल किया जाएगा।
इसके बाद UIDAI उस रूपरेखा को विभिन्न हितधारकों (सामान्य नागरिक, राज्य सरकारें, बैंकिंग/फ़ाइनेंशियल सेक्टर, दूरसंचार आदि) के साथ साझा कर क्रियान्वयन-योजनाएँ तैयार करेगा।
इसका परिणाम यह होगा कि अगले वर्षों में Aadhaar-संबंधित सेवाओं में बदलाव देखने को मिल सकता है-जैसे बेहतर ऑथेंटिकेशन, संपर्क-रहित (contactless) biometrics, बेहतर डेटा-लिंकिंग, तथा गोपनीयता-उन्मुख नवाचार।
संदर्भ / पृष्ठभूमि
Aadhaar, जिसे भारत में 12-अंकीय संख्या सिस्टम के रूप में जाना जाता है, लगभग 13.8 करोड़ से अधिक लोगों को जारी किया जा चुका है। इसके माध्यम से सरकार और निजी क्षेत्र की अनेक सेवाएँ, लाभ-वितरण, बैंकिंग व पहचान-करण प्रणालियाँ जुड़ी हुई हैं।
हालाँकि, समय-साथ इस प्रणाली ने कई चुनौतियाँ भी झेली हैं-जैसे डेटा-लीक, गोपनीयता-चिंताएँ व पहचान-प्रणाली की भरोसे-योग्यता।
इस पृष्ठभूमि में, UIDAI का यह कदम महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि डिजिटल पहचान अब सिर्फ पहचान देने का माध्यम नहीं, बल्कि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही है। सीधे शब्दों में-यदि Aadhaar अगले दशक में आधुनिक तकनीक, सुरक्षा व नीति-अनुरूपता के साथ तैयार नहीं हुआ तो यह सेवा-डिलीवरी, अर्थव्यवस्था व नागरिक-विश्लेषण पर असर डाल सकती है।
इसलिए ‘Aadhaar विजन 2032’ सिर्फ एक तकनीकी अपडेट नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की नींव रख रहा है।
स्रोत: siasat, economictimes






