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पाकिस्तान ने भारत को 191 रन से धूल चटाई, समीर मिन्हास के 172 रनों ने मचाया तहलका

पाकिस्तान की अंडर-19 क्रिकेट टीम ने रविवार को दुबई में हुए अंडर-19 एशिया कप 2025 के फाइनल में पहले अजेय रहे भारत को 191 रनों से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के नायक थे ओपनर समीर मिन्हास, जिन्होंने 172 रनों की शानदार पारी खेलकर पाकिस्तान को 8 विकेट पर 347 रनों का भारी स्कोर खड़ा करने में अगुआई की। यह लक्ष्य भारतीय बल्लेबाजी लाइनअप के लिए असंभव साबित हुआ।

यह नतीजा ग्रुप स्टेज से एकदम उलट था, जहां एक सप्ताह पहले भारत ने पाकिस्तान को 90 रनों से हराया था। इस बार हालात पूरी तरह बदल गए। अनुशासित गेंदबाजी के दम पर पाकिस्तान ने भारत को महज 26.2 ओवर में 156 रनों पर समेट दिया। इस जीत के साथ ही पाकिस्तान ने अपना दूसरा अंडर-19 एशिया कप खिताब जीता। यह उनकी पहली एकमात्र जीत है, क्योंकि 2013 में वह भारत के साथ संयुक्त विजेता रहे थे।

पाकिस्तान की जीत की नींव तब पड़ी जब भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। यह निर्णय उल्टा पड़ गया और समीर मिन्हास ने शुद्ध प्रभुत्व वाली पारी खेली। ग्रुप स्टेज में 177 रन बनाने वाले इस ओपनर ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और महज 29 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।

मिन्हास ने यहीं रुकने का नाम नहीं लिया। उन्होंने टूर्नामेंट का अपना दूसरा शतक 71 गेंदों में पूरा किया। इस पारी में उन्होंने स्पिनर्स के खिलाफ चौके-छक्के लगाए, पेसर्स को दूर-दूर तक मारा और गैप आसानी से ढूंढे। 113 गेंदों पर खेली गई उनकी 172 रनों की यह पारी 17 चौकों और 9 छक्कों की मदद से बनी। उन्होंने अहमद हुसैन के साथ 100 रनों की साझेदारी की, जिन्होंने 72 गेंदों में 56 रन बनाए। इस साझेदारी ने पाकिस्तान की पकड़ और मजबूत कर दी।

मैच के बाद निराश भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने कहा कि उनकी टीम का दिन अच्छा नहीं रहा और पाकिस्तान ने बहुत अच्छा बल्लेबाजी की। मैच जीतने वाली दोहरी शतकीय पारी और टूर्नामेंट भर के लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए समीर मिन्हास को मैच ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द सीरीज के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

348 रनों के भारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारत को तेज शुरुआत की जरूरत थी। शुरुआती दो ओवर में वैभव सूर्यवंशी के दो छक्कों की बदौलत टीम ने 32 रन बना लिए। लेकिन यह उम्मीद जल्द ही खत्म हो गई।

भारतीय पारी का पतन पाकिस्तान की पेस बैटरी ने शुरू किया। अली रजा ने पहले कप्तान म्हात्रे को 2 रन पर आउट किया। मोहम्मद सय्यम ने खतरनाक आरोन जॉर्ज को 16 रन पर पवेलियन लौटाया। अहम मोड़ तब आया जब अली रजा ने वैभव सूर्यवंशी को कैच आउट करवाया। इसके साथ ही भारत पांचवें ओवर में 49 रन पर 3 विकेट खो चुका था।

इसके बाद भारतीय विकेट लगातार गिरते चले गए। टूर्नामेंट में अब तक टीम की रीढ़ रहा मध्यक्रम स्कोरबोर्ड के दबाव में ढह गया। कोई भी बल्लेबाज 30 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सका। पाकिस्तान के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। अली रजा ने 4 विकेट लिए, जबकि मोहम्मद सय्यम, अब्दुल सुभान और हुजैफा अहसन ने 2-2 विकेट झटके।

भारतीय पारी की सबसे बड़ी साझेदारी दीपेश देवेंद्रन और किशन सिंह के बीच आखिरी विकेट के लिए 36 रनों की रही। यह साझेदारी टॉप ऑर्डर की विफलता को ही रेखांकित करती नजर आई।

यह जीत पाकिस्तान की जूनियर टीम के लिए एक बड़ा बयान है। ग्रुप स्टेज में पिछड़ने के बाद उन्होंने फाइनल में उल्लेखनीय लचीलापन और रणनीतिक कुशलता दिखाई। उनकी पेस-हैवी अटैक, जो उनकी ज्ञात ताकत है, ने अपनी योजना को पूरी तरह अंजाम दिया। वहीं, समीर मिन्हास के नेतृत्व में बल्लेबाजी ने भी शानदार प्रदर्शन किया।

भारत के लिए यह हार एक प्रभावशाली अभियान का अचानक अंत साबित हुई। वह सभी-फॉर्म वाली टीम, जिसने अब तक सभी को पीछे छोड़ा था, सबसे खराब दिन सामूहिक रूप से फेल हो गई। खासतौर पर बल्लेबाजी, जो बड़े मैच के दबाव को संभालने में नाकाम रही, जांच के दायरे में आ सकती है।

पाकिस्तान की टीम ने समीर मिन्हास को कंधों पर उठाकर जीत का जश्न मनाया। यह नतीजा क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता की अप्रत्याशित और उग्र प्रकृति की याद दिलाता है। पाकिस्तान के युवा खिलाड़ियों ने न केवल ग्रुप स्टेज की हार का बदला लिया, बल्कि इसे सबसे जबरदस्त अंदाज में करते हुए महाद्वीपीय ताज अपने नाम किया। उनका यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों तक याद रखा जाएगा।