ईडन गार्डन्स पर रविवार का दिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए मायूसी लेकर आया। दक्षिण अफ्रीका ने भारत को केवल 124 रनों के मामूली लक्ष्य का पीछा करते हुए 30 रन से मात दी। यह जीत उनकी भारतीय सरजमीं पर पिछले 15 वर्षों में पहली जीत है। भूलभुलैया जैसी इस पिच पर भारतीय बल्लेबाजी कठिनाइयों में घिर गई और कुल मिलाकर महज 93 रन पर सिमट गई। यह हार टीम के लिए एक गहरा झटका साबित हुई, जो अपनी घरेलू मैदानों पर अजेय समझी जाती थी।
खेल के दर्शक दक्षिण अफ्रीका के स्पिन आक्रमण के आगे भारतीय टीम को जूझते हुए देखते रहे। हर रन के साथ उम्मीदों की किरण जगी, लेकिन हर विकेट के साथ हार की संभावना और गहरी होती गई।
### दक्षिण अफ्रीका की जीत में साइमन हार्मर और टेम्बा बावुमा छाए
टेम्बा बावुमा और साइमन हार्मर इस मैच के हीरो रहे। बावुमा ने धैर्य और संयम के साथ 50 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, जबकि हार्मर ने चार महत्वपूर्ण विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजों को अचंभित कर दिया।
### भारतीय बल्लेबाजी: तकनीक और दृढ़ता की कमी
शुबमन गिल की चोट ने भारतीय टीम के लिए चिंता और बढ़ा दी। टीम की बल्लेबाजी कमजोर दिखाई दी। पूर्व क्रिकेटरों ने स्पिन बॉलिंग के खिलाफ भारतीय बल्लेबाजों की तकनीक और दृढ़ता पर सवाल उठाया।
### पिच और चयन पर विवाद
ईडन गार्डेंस की पिच को लेकर भी बहस हुई। कोच गौतम गंभीर का कहना था कि पिच ठीक वैसी थी जैसी उन्होंने चाही थी, लेकिन कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसे अपर्याप्त तैयारी वाला माना।
### क्या भारत ने अपना घरेलू किला खो दिया है?
हाल के समय में भारत ने अपने घरेलू मैदानों पर छह में से चार टेस्ट हारे हैं। यह आंकड़ा घरेलू अजेयता की धारणा को चुनौती देता है।
### आगे क्या?
अब सबकी नज़रें 22 नवंबर को गुवाहाटी में होने वाले दूसरे टेस्ट मैच पर हैं। शुबमन गिल की फिटनेस पर संदेह है, और कई नए चेहरे जैसे कि साई सुधर्शन और देवदत्त पाड्डीकाल को मौका मिल सकता है।
भारतीय टीम को अब अपनी रणनीति, पिच और खिलाड़ियों के चयन में सुधार लाना होगा। ईडन गार्डन्स का यह टेस्ट हालांकि हार से भरा रहा, लेकिन इसने यह दिखाया कि उच्च स्तर पर सफलता के लिए तकनीक, अनुकूलन और स्पष्ट इरादे कितने अहम होते हैं।






